2026: A Journey from Self-Reflection to Selfless Service
*वर्ष 2026-’’आत्म चिंतन, स्व-चेतना तथा स्वार्थ से सेवार्थ की नई उम्मीद’’
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वर्ष 2025 को जाते समय न लगा और फिर एक नया वर्ष हमारी दहलीज़ पर नई आशाओं को लिए खड़ा हुआ है। नया साल केवल कैलेण्डर की तारीख बदलना नहीं है, बल्कि एक ऐसा क्षण है हम अपने भीतर झांककर जीवन को नई दिशा में बढ़ने का अवसर पाते हैं। वर्ष 2025 में यदि हम कुछ अपना कीमती समय मूल्यांकन पर रखें तो पाएंगे कि हमारा काफी समय रोज़ की दैनिक दिनचर्याओं तथा भौतिक जगत के उन क्षणिक चीज़ों से जुड़ने में चला गया जिसका हमारा आत्मिक विकास से कोई सरोकार नहीं है।
बीता वर्ष हर व्यक्ति के लिए उतार-चढ़ाव से भरा हुआ रहा, पर इस कश्मकश में हम क्या भूल बैठे और क्या हमने अपने जीवन में अपनाया इस पर विचार करना अतिमहत्वपूर्ण विषय है। हम सब के लिए यह जरूरी हो गया है कि हम 24 घंटे या सप्ताह में एक बार थोड़ा समय निकालकर अपने जाते हुए समय को गहराई से देखें तथा निरीक्षण करें कि क्या जो हम कर रहें हैं या जीवन में हमारे द्वारा घटित हो रहा है, क्या वो सही है, क्या हम किसी को मानसिक, शारीरिक या किसी भी रूप में नुकसान तो नहीं पहुंचा रहें हैं, या मेरे द्वारा किया गया कार्य मुझे उस असीम सत्ता (ईश्वर) से जोड़ने में कहां तक सहायक है, ऐसे कई प्रश्न हम सब को थोड़ा अपने जीवन से समय निकालकर खुद से पूछने की आवश्यकता है।
देवेंद्र मोहन ’’भइया जी’’ जो कि लाईफ कोच, मोटिवेशनल स्पीकर तथा आध्यात्मिक गुरू भी हैं, उनके कई सत्संगों तथा मोटिवेशनल स्पीचेस में आत्म-चिंतन (Self-reflection) तथा स्व-चेतना (Self-awareness) की बात कही है। उन्होंने इस नए वर्ष को अपने अंदर की कुरीतियों को धीरे-धीरे खत्म करके अपने आत्मिक विकास की ओर बढ़ने वाला बताया है। वो बताते हैं कि अध्यात्म का उद्देश्य है-अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानना, जीवन के अनुभवों को समझना और भीतर की शांति को जाग्रत करना है, आत्म-चिंतन इस पूरी प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण साधन है। आत्म-चिंतन हमें यह देखने में सक्षम बनाता है कि हमारे मन में कौन-कौन सी भावनाएं उठती हैं, तथा हम किस वजह से दुःखी, क्रोधित तथा चिंता महसूस कर रहें हैं। आत्म-चिंतन से व्यक्ति अपने कर्मों के प्रति और अधिक सजग हो जाता है। किसी व्यक्ति में आत्म-चिंतन, स्व-चेतना को जाग्रत करने की पहली सीढ़ी का काम करता है।
भइया जी कहते हैं कि ये नया वर्ष स्वयं की ओर मुड़ने का वर्ष है। जहां नया वर्ष हमें नई उम्मीदें, आशाएं तथा हर कार्य को करने की नई प्रेरणा देता है वहीं दूसरी ओर वो हमें अपने अंदर की कुरीतियों को खत्म करने की पहल करना भी सिखाता है। भइया जी इस नए वर्ष को सेवार्थ रूप में देखते हैं। मनुष्य जीवन का लक्ष्य स्वार्थ से हटकर सेवा की ओर अग्रसर होने वाला होना चाहिए। जब हम अपने आंतरिक शुद्धिकरण पर जाते हैं तो सेवा उसकी साथी बन जाती है, ये इस तरह जैसे हम अपने ’’स्व’’ को हटाते हैं वहां से परहित की भावना परस्पर हमारे अंदर घर करने लगती है, अग्रेतर यह भावना हमारे अंदर के अहंकार को हटाकर विनम्रता रूपी गहने में परिवर्तित होने लगती है।
नए वर्ष का आरंभ ध्यान, प्रार्थना, कृतज्ञता तथा कुछ क्षणों की मौन साधना के संकल्प को लेकर किया जाना चाहिए। भइया जी द्वारा संकल्प की भावना को सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। लोग नए साल पर कई संकल्प तो बनाते हैं लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है संकल्पशीलता, यानी हर पल जागरूक रहकर सही दिशा में चलना। वो बताते हैं कि कृतज्ञता की भावना भी हमारी आंतरिक ऊर्जा को ऊॅचा उठाती है तथा हमें दिव्यता से जोड़ती है।
भइया जी द्वारा संचालित गैर-सरकारी संस्था ’’रजनी केयर फाउण्डेशन’’(आर0सी0एफ0) जो कि वर्ष 2023 से लगातार ऐसे सेवा रूपी कार्यों में अपना अहम योगदान दे रही है, संस्था के माध्यम से हम इस नए वर्ष पृथक दृष्टि से उन जरूरतमंदों तक पहुंचने की कोशिश करेंगे जो अपनी मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित है। भइया जी का कहना है कि आत्मिक चेतना तथा सेवा द्वारा हम इस नए वर्ष को नई ऊर्जा के साथ उस पर काम कर सकते हैं जिससे हम अपना तथा दूसरों के मददगार बनें।
आध्यात्मिक दृष्टि से नया साल आत्मा का नया अध्याय है-एक ऐसा अवसर जिसमें हम बीते अनुभवों को गुरू बनाकर, नई आशाओं को साथी बनाकर, और ईश्वर की कृपा को मार्गदर्शक बनाते हुए आगे बढ़ सकते हैं। नया वर्ष हमें स्मरण कराता है कि समय निरंतर बहता रहता है और हर नया वर्ष जीवन को फिर से देखने, समझने और संवारने का निमंत्रण है।